भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के प्रस्तावित Expiry-Day Rules को बाजार विशेषज्ञों का समर्थन मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम Expiry-Day Volatility, क्लोजिंग ऑक्शन में संभावित हेरफेर और डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट को लेकर भ्रम कम कर सकते हैं।
SEBI ने शनिवार को जारी कंसल्टेशन पेपर में Closing Auction Session (CAS), बाजार के समय और डेरिवेटिव्स सेटलमेंट से जुड़े कई बदलाव प्रस्तावित किए हैं। इनमें डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस को कैश मार्केट के क्लोजिंग प्राइस से अलग करना, CAS के दौरान लाइव इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू बंद करना और 1% बैंड से बाहर दिए गए ऑर्डर को अधिक बाध्यकारी बनाना शामिल है।
Anand Rathi Wealth के Joint CEO Feroze Azeez ने कहा कि प्रस्ताव तीन प्रमुख समस्याओं को संबोधित करता है—कैश और डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट का संबंध, इंडिकेटिव ऑक्शन प्राइस से पैदा होने वाली अस्थिरता और ऑर्डर कैंसिलेशन का जोखिम। उनके मुताबिक, इससे Market Manipulation की गुंजाइश घट सकती है।
Tradejini के COO Trivesh Dinesh ने अंतिम 30 मिनट की लगातार ट्रेडिंग के VWAP से एक्सपायरी सेटलमेंट तय करने के प्रस्ताव को सरल और पारदर्शी बताया। उन्होंने नियमित ट्रेडिंग को 3:30 बजे तक जारी रखने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया।
CAS को 3 अगस्त से डेरिवेटिव्स वाले शेयरों में लागू किया गया था। इससे पहले क्लोजिंग प्राइस अंतिम 30 मिनट के ट्रेडिंग VWAP से तय होता था। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित बदलाव Derivatives Settlement, Closing Auction और Stock Market Volatility को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद कर सकते हैं।

