भारत की अगली औद्योगिक ग्रोथ को छह उभरते सेक्टर नई दिशा दे सकते हैं। Jefferies के मुताबिक Space, Semiconductors, Data Centres, Electronics, Solar Manufacturing और Aerospace आने वाले वर्षों में बड़े निवेश आकर्षित कर सकते हैं। सरकारी प्रोत्साहन, localisation policies, tax benefits और बड़े घरेलू बाजार से इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ रही है।
इनमें Data Centres सबसे बड़े निवेश अवसरों में शामिल हैं। भारत की colocation data-centre capacity पिछले पांच वर्षों में पांच गुना बढ़कर करीब 2 GW हो गई है। Jefferies को अगले पांच वर्षों में इसके फिर पांच गुना बढ़कर करीब 10 GW होने की उम्मीद है। इसके लिए करीब $45 अरब का capital expenditure लग सकता है और data-centre operators के लिए लगभग $9 अरब का revenue opportunity बन सकता है।
भारत की Space Economy भी 2030 तक 2023 के स्तर से करीब पांच गुना बढ़कर $40-45 अरब तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। Skyroot Aerospace, Pixxel, Agnikul Cosmos और Digantara जैसी निजी कंपनियां commercialisation की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
Semiconductors में करीब $20 अरब का निवेश पहले ही आगे बढ़ रहा है, जबकि लगभग $13 अरब की नई incentive योजना ecosystem को और विस्तार दे सकती है। हालांकि supply chain, skilled talent और global competition बड़ी चुनौतियां हैं।
Electronics Manufacturing में local value addition अगले छह वर्षों में 50% तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि PCB बाजार करीब $5 अरब का अवसर पेश करता है। Solar Manufacturing में करीब 35 GW cell capacity चालू है और लगभग 100 GW क्षमता निर्माणाधीन है। वहीं Aerospace में Boeing और Airbus भारत से सालाना $1.4-1.6 अरब की sourcing करते हैं।
Jefferies के अनुसार, ये छह सेक्टर भारत के अगले दशक के प्रमुख High Growth Sectors, Data Centre Boom, Space Economy, Semiconductor Investment और Manufacturing Growth के आधार बन सकते हैं।
