Axis MF CIO की चेतावनी: यह एक गलती आपकी वर्षों की दौलत को कर सकती है बर्बाद

Axis MF CIO की चेतावनी: यह एक गलती आपकी वर्षों की दौलत को कर सकती है बर्बाद

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में निवेश की रणनीति क्या होनी चाहिए। R Sivakumar, CIO, Axis Mutual Fund के मुताबिक, बाजार में गिरावट या तेजी से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों और निवेश योजना पर कायम रहें। उनके अनुसार, लंबे समय की दौलत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली गलती तब होती है, जब डर या लालच निवेश के फैसलों पर हावी हो जाता है। इससे निवेशक गिरावट में घबराकर बेच सकते हैं और तेजी में महंगे स्तरों पर खरीदारी कर सकते हैं, जिससे कंपाउंडिंग का फायदा प्रभावित होता है।

Upstox News के साथ एक विशेष बातचीत में शिवकुमार ने 2026 में म्यूचुअल फंड निवेशकों के सामने आने वाले कई महत्वपूर्ण सवालों पर अपनी राय दी। उन्होंने हालिया बाजार उतार-चढ़ाव के बीच SIP जारी रखने, अगले 12-18 महीनों के संभावित जोखिम, लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए संभावित सेक्टर, पोर्टफोलियो में म्यूचुअल फंड की संख्या, रिटायरमेंट प्लानिंग और 20-30% बाजार गिरावट की स्थिति में निवेशकों की रणनीति पर बात की।

उन्होंने निवेशकों को बाजार की अगली चाल का अनुमान लगाने के बजाय अनुशासित निवेश, सही एसेट एलोकेशन और लंबे समय तक निवेशित रहने पर जोर दिया। उनके 13 अहम सवालों और जवाबों में निवेशकों के लिए कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।

1. हालिया बाजार उतार-चढ़ाव के बाद इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों को क्या करना चाहिए?

शिवकुमार के मुताबिक, निवेशकों को बाजार में बेहतर मौके का इंतजार करने के बजाय अपनी SIP जारी रखने पर ध्यान देना चाहिए। हालिया अस्थिरता के बावजूद बाजार अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 6-7% नीचे और इस साल के निचले स्तर से लगभग 10% ऊपर है।

उनके अनुसार, बाजार में उतार-चढ़ाव लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएशन का सामान्य हिस्सा है। अतिरिक्त पूंजी और लंबी निवेश अवधि वाले निवेशक अपनी एसेट एलोकेशन योजना के अनुरूप धीरे-धीरे इक्विटी में निवेश बढ़ा सकते हैं।

2. अगले 12-18 महीनों में भारतीय बाजारों के सामने सबसे बड़े जोखिम क्या हैं?

भारतीय अर्थव्यवस्था के लंबी अवधि के विकास की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। जनसांख्यिकी, अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण, बचत का वित्तीय बाजारों में बढ़ता निवेश और घरेलू निवेश चक्र इसके प्रमुख आधार हैं।

हालांकि, अगले 12-18 महीनों में भू-राजनीतिक तनाव, AI ट्रेड में बदलाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, बदलते व्यापार संबंध और अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा बाजार को प्रभावित कर सकती है। घरेलू स्तर पर कंपनियों की कमाई, निजी क्षेत्र का कैपेक्स और कुछ क्षेत्रों में ऊंचे वैल्यूएशन पर नजर रखना जरूरी होगा।

3. अगले दशक में कौन से सेक्टर वेल्थ क्रिएशन के प्रमुख स्रोत बन सकते हैं?

शिवकुमार के अनुसार, लंबी अवधि की वेल्थ क्रिएशन आमतौर पर शॉर्ट टर्म ट्रेंड के बजाय अर्थव्यवस्था में होने वाले संरचनात्मक बदलावों से आती है। ऊर्जा, मैन्युफैक्चरिंग, वित्तीय सेवाएं, हेल्थकेयर और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें लंबी अवधि के अवसर दिखाई देते हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में पावर जनरेशन, ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रिड आधुनिकीकरण और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़े निवेश की जरूरत होगी। वित्तीय सेवाओं में बढ़ती वित्तीय पहुंच और घरेलू बचत के वित्तीय उत्पादों में बढ़ते निवेश से भी लंबी अवधि में फायदा मिल सकता है।

4. क्या निवेशक लॉन्ग टर्म लक्ष्य के बजाय शॉर्ट टर्म रिटर्न पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं?

डिजिटल निवेश के बढ़ने से लाखों नए निवेशक इक्विटी बाजार में आए हैं। इसके साथ ही बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव और शॉर्ट टर्म रिटर्न पर ध्यान देने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।

शिवकुमार के मुताबिक, सफल निवेश का मतलब बाजार की अगली चाल का अनुमान लगाना नहीं है। पोर्टफोलियो में निवेशक की जोखिम क्षमता और लक्ष्य के अनुसार इक्विटी, डेट और अन्य एसेट क्लास का संतुलन होना चाहिए। इक्विटी के भीतर ग्रोथ, वैल्यू, क्वालिटी और मोमेंटम जैसी रणनीतियों में उचित विविधता रखना भी महत्वपूर्ण है।

5. एक औसत निवेशक को कितने म्यूचुअल फंड रखने चाहिए?

शिवकुमार के अनुसार, फंड की संख्या से ज्यादा जरूरी पोर्टफोलियो का सही डायवर्सिफिकेशन है। निवेशकों को दर्जनों स्कीम रखने की जरूरत नहीं है। इक्विटी, डेट और हाइब्रिड कैटेगरी का सोच-समझकर चुना गया मिश्रण कई निवेशकों के लिए पर्याप्त हो सकता है।

इक्विटी पोर्टफोलियो में एक्टिव और पैसिव रणनीतियों, अलग-अलग मार्केट-कैप और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के जरिए विविधता लाई जा सकती है। सरल पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान निवेश बनाए रखना आसान बनाता है।

6. निवेशक को म्यूचुअल फंड से कब बाहर निकलना चाहिए?

सिर्फ कुछ समय के खराब प्रदर्शन के आधार पर म्यूचुअल फंड बेच देना उचित नहीं है। हर निवेश रणनीति अलग-अलग बाजार चक्रों से गुजरती है और फंड के प्रदर्शन का आकलन पर्याप्त समय अवधि में उसकी निवेश प्रक्रिया और भूमिका के संदर्भ में किया जाना चाहिए।

एग्जिट तब उचित हो सकता है, जब निवेशक के वित्तीय लक्ष्य, एसेट एलोकेशन या जोखिम क्षमता में बदलाव हो जाए। इसके अलावा, फंड की निवेश प्रक्रिया या अपने उद्देश्य को पूरा करने की क्षमता में लगातार गिरावट भी बाहर निकलने का कारण हो सकती है।

7. रिटायरमेंट के बाद नियमित आय के लिए म्यूचुअल फंड या FD में से क्या बेहतर है?

फिक्स्ड डिपॉजिट अपनी स्थिरता और अनुमानित रिटर्न के कारण रिटायर लोगों के बीच लोकप्रिय रहा है। हालांकि, शिवकुमार के मुताबिक, लंबे समय के आंकड़ों में डेट म्यूचुअल फंड ने कई बाजार चक्रों में पारंपरिक बचत साधनों और FD की तुलना में बेहतर पोस्ट-टैक्स और महंगाई-समायोजित परिणाम दिए हैं।

उनके अनुसार, रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में सिर्फ FD या म्यूचुअल फंड में से किसी एक को चुनना जरूरी नहीं है। डेट और हाइब्रिड फंड के साथ SWP जैसे विकल्प नियमित कैश फ्लो देने में मदद कर सकते हैं।

8. रिटायरमेंट प्लानिंग में निवेशक सबसे बड़ी गलतियां कौन-सी करते हैं?

सबसे आम गलतियों में रिटायरमेंट की अवधि और भविष्य के खर्च को कम आंकना शामिल है। कई लोग आज के खर्च के आधार पर रिटायरमेंट कॉर्पस तय करते हैं और महंगाई, बढ़ते हेल्थकेयर खर्च तथा लंबी जीवन प्रत्याशा को पर्याप्त महत्व नहीं देते।

दूसरी गलती बहुत जल्दी अत्यधिक कंजर्वेटिव हो जाना है। 20-30 साल तक चलने वाले रिटायरमेंट के लिए केवल पूंजी बचाना पर्याप्त नहीं है। महंगाई से मुकाबले के लिए पोर्टफोलियो में पर्याप्त ग्रोथ एसेट्स भी जरूरी हैं।

9. इंटरनेशनल फंड में निवेश को किस नजरिए से देखना चाहिए?

शिवकुमार के मुताबिक, इंटरनेशनल फंड को मुख्य रूप से डायवर्सिफिकेशन के साधन के रूप में देखना चाहिए, न कि केवल ज्यादा रिटर्न कमाने के तरीके के रूप में।

अलग-अलग देशों और अर्थव्यवस्थाओं के बाजार चक्र अलग होते हैं। अंतरराष्ट्रीय निवेश से ऐसे वैश्विक बिजनेस, सेक्टर और टेक्नोलॉजी में एक्सपोजर मिल सकता है, जो भारतीय बाजार में पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, इंटरनेशनल फंड घरेलू इक्विटी के मुख्य पोर्टफोलियो का विकल्प नहीं होना चाहिए।

10. 2026 में पहली बार म्यूचुअल फंड निवेश करने वालों को क्या सलाह है?

पहली बार निवेश करने वालों के लिए शिवकुमार का संदेश है कि बाजार की अगली चाल का अनुमान लगाने के बजाय अनुशासित निवेश पर ध्यान दें। निवेश की शुरुआत जल्दी करना, नियमित रूप से निवेश करना और बाजार के अलग-अलग चक्रों के दौरान निवेशित बने रहना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

उनके मुताबिक, एक अनुशासित SIP लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन का प्रभावी माध्यम बन सकता है। असली फायदा बाजार की टाइमिंग से नहीं, बल्कि कंपाउंडिंग को लंबे समय तक काम करने देने से मिलता है।

11. कौन-सी एक गलती लंबे समय की दौलत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है?

शिवकुमार के मुताबिक, निवेश योजना पर भावनाओं को हावी होने देना सबसे बड़ी गलतियों में से एक है। निवेशक अक्सर बाजार की तेजी में सबसे ज्यादा आशावादी और गिरावट के दौरान सबसे ज्यादा डरे हुए होते हैं।

इसका नतीजा यह हो सकता है कि वे तेजी के दौरान ऊंची कीमतों पर खरीदारी करें और गिरावट के समय बेच दें। बार-बार बाजार में प्रवेश और निकासी करने से कंपाउंडिंग बाधित होती है। लंबे समय में महंगी व्यवहारिक गलतियों से बचना, असाधारण निवेश फैसले लेने से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

12. अगर बाजार में 20-30% की गिरावट आती है तो निवेशकों को क्या करना चाहिए?

20-30% की गिरावट निवेशकों के लिए डरावनी लग सकती है, लेकिन इक्विटी निवेश में तेज गिरावट कोई असामान्य घटना नहीं है। लंबे समय में इक्विटी से मिलने वाले रिटर्न के साथ ऐसे अस्थिर दौर भी आते रहे हैं।

ऐसी स्थिति में निवेशकों को तुरंत पोर्टफोलियो बदलने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और एसेट एलोकेशन की समीक्षा करनी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक अपनी SIP जारी रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बाजार की अस्थिरता के दौरान एसेट एलोकेशन को दोबारा संतुलित कर सकते हैं।

13. 30, 40, 50 साल की उम्र और रिटायरमेंट के लिए स्वस्थ पोर्टफोलियो कैसा होना चाहिए?

शिवकुमार के मुताबिक, एक स्वस्थ पोर्टफोलियो केवल उम्र के आधार पर तय नहीं होता। निवेशक के वित्तीय लक्ष्य, जिम्मेदारियां, निवेश की अवधि और जोखिम क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

30 साल के निवेशक के पास लंबी अवधि होने के कारण इक्विटी और ग्रोथ एसेट्स में ज्यादा निवेश की गुंजाइश हो सकती है। 40 की उम्र में ग्रोथ के साथ अलग-अलग एसेट क्लास, निवेश रणनीतियों और भौगोलिक क्षेत्रों में डायवर्सिफिकेशन बढ़ाया जा सकता है। 50 की उम्र में ग्रोथ और पूंजी संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी हो जाता है।

रिटायरमेंट के बाद प्राथमिकता नियमित आय और पूंजी संरक्षण की होती है, लेकिन महंगाई से मुकाबले के लिए पर्याप्त ग्रोथ एसेट्स बनाए रखना भी जरूरी है। हर उम्र में पोर्टफोलियो को वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप डायवर्सिफाइड रखना और बाजार के अलग-अलग चक्रों में निवेश जारी रखने लायक बनाना महत्वपूर्ण है।

शिवकुमार की पूरी बातचीत का मुख्य संदेश यह है कि Mutual Fund Investment में सफलता केवल सही फंड चुनने पर निर्भर नहीं करती। SIP Investment, सही एसेट एलोकेशन, डायवर्सिफिकेशन और लंबे समय तक निवेशित रहना Wealth Creation की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खासकर Mutual Fund Investors को बाजार की हर छोटी गिरावट पर फैसला लेने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, Retirement Planning में महंगाई, लंबी रिटायरमेंट अवधि और नियमित आय की जरूरत को शुरुआत से शामिल करना जरूरी है।