भारतीय रुपया 17 सितंबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। यह जुलाई के बाद पहली बार है जब Rupee vs Dollar इस स्तर से नीचे गया है। रुपया पिछले सत्र के 95.95 के बंद स्तर से कमजोर होकर 96.03 प्रति डॉलर पर कारोबार करता दिखा।
रुपये पर दबाव की बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का 25 बेसिस पॉइंट की Fed Rate Hike का फैसला है। फेड ने अपनी बेंचमार्क दर बढ़ाकर 3.75%-4% कर दी। यह 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है। फेड के 18 में से 16 नीति निर्माताओं ने इस साल कम से कम एक और 25 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी का संकेत दिया है।
इस फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर पहुंच गया, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा। वहीं, Crude Oil Price भी करीब 105.69 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। महंगा तेल भारत की डॉलर मांग और आयात लागत को बढ़ाता है।
CR Forex Advisors के अमित पाबारी के अनुसार, 96 के ऊपर टिकाऊ कमजोरी होने पर रुपया 96.30-96.50 के स्तर तक जा सकता है। इस बीच RBI Repo Rate, Dollar Rate और विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर बाजार की नजर रहेगी।
फेड की सख्त नीति, महंगा कच्चा तेल और विदेशी पोर्टफोलियो आउटफ्लो आने वाले समय में रुपये के लिए प्रमुख दबाव बने रह सकते हैं।

