UPI Payment Charges पर सरकार का बड़ा फैसला, ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर बैंक नहीं वसूल सकेंगे फीस

UPI Payment Charges पर सरकार का बड़ा फैसला, ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर बैंक नहीं वसूल सकेंगे फीस

भारत सरकार ने डिजिटल पेमेंट को लेकर एक अहम बदलाव किया है। सोमवार, 14 सितंबर 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के तहत बैंकों को ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क लगाने से रोक दिया गया है। यह बदलाव Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत किया गया है।

नई अधिसूचना में RuPay-powered debit cards और ₹2,000 तक के UPI transactions को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इसके मुताबिक, कोई बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर इन माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं ले सकेगा।

यह कदम खास तौर पर छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतान के लिए महत्वपूर्ण है। UPI Payment Charges पर लंबे समय से चर्चा होती रही है, क्योंकि UPI भारत में रोजमर्रा के छोटे लेनदेन का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ₹2,000 की सीमा के कारण छोटे व्यापारियों और ग्राहकों पर तत्काल शुल्क का जोखिम कम रहेगा।

हालांकि, बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहले का प्रावधान सभी संबंधित डिजिटल भुगतानों पर शुल्क लगाने से रोकता था। अब ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए शुल्क लगाए जाने की संभावना का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल सरकार ने UPI Charges, उनकी दर या लागू करने की व्यवस्था पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। इसलिए बड़े डिजिटल भुगतान पर संभावित असर अभी स्पष्ट नहीं है।