भारतीय अर्थव्यवस्था ने FY27 की दूसरी तिमाही की शुरुआत में मजबूत घरेलू मांग के संकेत दिए हैं। अगस्त में GST Collection, UPI Transactions और ऑटो बिक्री में तेज वृद्धि दर्ज हुई, हालांकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का भरोसा कमजोर पड़ा है।
अगस्त में सकल GST संग्रह सालाना आधार पर करीब 15% बढ़कर लगभग ₹2 लाख करोड़ पहुंच गया। हालांकि इसमें आयात से मिलने वाले राजस्व की बड़ी भूमिका रही। Import-related GST 29% बढ़कर ₹62,604 करोड़ हुआ, जबकि घरेलू संग्रह 9.3% बढ़कर ₹1.37 लाख करोड़ रहा। अप्रैल-अगस्त के दौरान कुल GST संग्रह 11% बढ़कर ₹10.43 लाख करोड़ रहा।
डिजिटल भुगतान में भी रिकॉर्ड बना। अगस्त में UPI Transactions 24.5 अरब के नए उच्च स्तर पर पहुंच गए, जो पिछले साल की तुलना में 22.5% अधिक है। UPI का कुल लेनदेन मूल्य करीब ₹29.8 लाख करोड़ रहा।
खपत की मजबूती Auto Sales में भी दिखाई दी। Maruti Suzuki की कुल बिक्री 21.3% बढ़कर 2,19,220 यूनिट रही, जबकि Mahindra की Passenger Vehicle बिक्री 50.4% बढ़ी। Hyundai की घरेलू बिक्री 23.6% और Escorts Kubota की Tractor Sales 20.5% बढ़ी।
इसके उलट Manufacturing PMI अगस्त में 53.5 से गिरकर 52.8 पर आ गया, जो पांच साल का सबसे कमजोर स्तर है। उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि अगस्त 2021 के बाद सबसे धीमी रही और मैन्युफैक्चरिंग रोजगार में ढाई साल बाद पहली बार गिरावट आई।
इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में स्पष्ट अंतर दिखता है—GST Collection, UPI Transactions और Auto Sales घरेलू मांग की मजबूती बता रहे हैं, जबकि Manufacturing PMI और Coal India की 5.8% कम उत्पादन वृद्धि औद्योगिक क्षेत्र पर दबाव के संकेत दे रही है। West Asia में तनाव के बीच Brent crude का $92 प्रति बैरल से ऊपर जाना भी आने वाले महीनों में लागत और महंगाई के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।

