UPI पर MDR की वापसी की तैयारी? सरकार घटा सकती है डिजिटल पेमेंट सब्सिडी का बोझ

UPI पर MDR की वापसी की तैयारी? सरकार घटा सकती है डिजिटल पेमेंट सब्सिडी का बोझ

सरकार Unified Payments Interface (UPI) से जुड़े बढ़ते खर्च को कम करने के लिए Merchant Discount Rate (MDR) की सीमित वापसी और चरणबद्ध इंसेंटिव मॉडल पर विचार कर रही है। वित्त मंत्रालय के Department of Financial Services (DFS) ने UPI सिस्टम की वित्तीय स्थिरता को लेकर ये दो विकल्प सामने रखे हैं।

Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, पहला विकल्प कुछ हाई-वैल्यू UPI ट्रांजैक्शन या चुनिंदा मर्चेंट्स पर MDR लागू करने की व्यवहार्यता जांचना है। दूसरा विकल्प ऐसा टियर आधारित इंसेंटिव सिस्टम तैयार करना है, जिसके जरिए अगले कुछ वर्षों में सरकारी सहायता धीरे-धीरे कम की जा सके।

संसदीय वित्त समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने UPI ट्रांजैक्शन को प्रोत्साहित करने और Zero-MDR से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया है। इसके मुकाबले इंडस्ट्री की अनुमानित परिचालन लागत करीब ₹20,700 करोड़ है।

समिति ने कहा कि मौजूदा सरकारी इंसेंटिव इंडस्ट्री की वास्तविक लागत का केवल करीब 11% और संभावित MDR कलेक्शन का लगभग 14% ही कवर करता है। इससे Payment Service Providers पर दबाव बढ़ रहा है और साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन तथा नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश प्रभावित हो सकता है।

भारत में UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 2019 तक 0.30% तक MDR लागू था। जनवरी 2020 में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए Zero-MDR व्यवस्था लागू की गई थी। संसदीय समिति के अनुसार, UPI भविष्य में हर महीने 150 अरब ट्रांजैक्शन और 60 करोड़ नए यूजर्स जोड़ने की क्षमता रखता है। ऐसे में MDR नीति में बदलाव डिजिटल पेमेंट कंपनियों और मर्चेंट्स दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।