SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey ने कहा है कि केवल Options Trading की जरूरतों को ध्यान में रखकर बाजार की नीतियां तय नहीं की जा सकतीं। भारत को Foreign Portfolio Investors (FPIs) को आकर्षित करने और Passive Investing को बढ़ावा देने पर भी ध्यान देना होगा। Pandey के मुताबिक, Passive Investing पहले ही बाजार का करीब 30% हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने सोमवार को NISM, पातालगंगा में आयोजित साइबर डिफेंस कार्यक्रम के दौरान कहा कि बाजार नियमन का उद्देश्य व्यापक निवेश भागीदारी और बाजार की दक्षता बढ़ाना होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि SEBI expiry days पर होने वाली असामान्य ट्रेडिंग गतिविधियों का विश्लेषण कर रहा है।
इस बीच, SEBI Securities Lending and Borrowing Mechanism (SLBM) में बड़े सुधार की तैयारी कर रहा है। Pandey ने कहा कि नए ढांचे पर Consultation Paper “बहुत जल्द” जारी किया जा सकता है। इसके लिए एक Working Group पहले से सुधारों की समीक्षा कर रहा है और बाजार प्रतिभागियों की राय भी ली जाएगी।
SLBM Reform का मकसद Securities Lending को अधिक आसान और व्यापक बनाना है। मौजूदा व्यवस्था में सीमित भागीदारी और ऊंची borrowing costs जैसी चुनौतियां रही हैं। बेहतर SLBM से Short Selling, Liquidity और Price Discovery को मजबूती मिल सकती है।
Pandey ने Closing Auction Session (CAS) को लेकर भी स्पष्ट किया कि “CAS is here to stay।” उनके अनुसार CAS शुरू होने के बाद भागीदारी बढ़ी है और Sensex-Nifty के बीच volatility तथा divergence में कमी आई है। NSE Clearing और BSE Clearing द्वारा हाल में तीन-दिन के SLBM contracts शुरू करना भी CAS में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

