₹84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी, गहरे समुद्र में तेल-गैस खोज को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

₹84,084 करोड़ की 'समुद्र मंथन' योजना को मंजूरी, गहरे समुद्र में तेल-गैस खोज को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

भारत सरकार ने देश में ऑफशोर तेल और गैस खोज को तेज़ करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेट्रोलियम मंत्रालय की राष्ट्रीय ऑफशोर एक्सप्लोरेशन योजना ‘समुद्र मंथन’ के लिए ₹84,084 करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। यह फंड वित्त वर्ष 2030-31 तक इस्तेमाल किया जाएगा और इसका उद्देश्य घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज को गति देना है।

योजना के तहत सबसे बड़ा आवंटन 60 डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन वेल की ड्रिलिंग के लिए किया गया है। इस मद में ₹43,200 करोड़ खर्च किए जाएंगे। सरकार प्रत्येक पात्र कुएं की ड्रिलिंग लागत का अधिकतम 50% या ₹675 करोड़ प्रति वेल तक सहयोग देगी, जिससे निजी और सार्वजनिक कंपनियों के लिए निवेश जोखिम कम हो सकेगा।

इसके अलावा ऑफशोर डेटा अधिग्रहण के लिए ₹28,534 करोड़, खोजे गए संसाधनों के व्यावसायीकरण को आसान बनाने हेतु कॉमन ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर हब विकसित करने के लिए ₹10,000 करोड़, जबकि घरेलू विनिर्माण और महत्वपूर्ण उपकरणों के स्थानीयकरण को बढ़ावा देने वाले ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विस ज़ोन के लिए ₹2,000 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।

सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक संभावित भंडारों की खोज को बढ़ावा देना है। लंबे समय से परिपक्व हो चुके मौजूदा तेल और गैस क्षेत्रों के उत्पादन में गिरावट को देखते हुए यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईवाई इंडिया के टैक्स एवं इकोनॉमिक पॉलिसी पार्टनर रजनीश गुप्ता के अनुसार, बड़े पैमाने पर सिस्मिक डेटा संग्रह और डीप तथा अल्ट्रा-डीपवॉटर ड्रिलिंग से भू-वैज्ञानिक अनिश्चितता कम होगी। यदि खोज सफल रहती है तो इससे निजी निवेश बढ़ने, ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर बनने और भारत के अपस्ट्रीम ऑयल-गैस उद्योग को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।