RBI MPC का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, बढ़ती महंगाई के बीच न्यूट्रल रुख कायम

RBI MPC का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, बढ़ती महंगाई के बीच न्यूट्रल रुख कायम

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है। 3 से 5 अगस्त तक चली बैठक में समिति ने अपनी न्यूट्रल पॉलिसी स्टांस भी बरकरार रखा। RBI का मानना है कि 2026-27 में महंगाई का दबाव 2025 की तुलना में अधिक रह सकता है, इसलिए फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव उचित नहीं होगा।

RBI गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक व्यापार मार्गों में बाधाएं, अमेरिका के नए टैरिफ और सप्लाई चेन पर असर से वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चित बनी हुई है। इसके साथ ही कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण निकट अवधि में खुदरा महंगाई बढ़ने की संभावना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि महंगाई का दबाव व्यापक नहीं है और मुख्य रूप से खाद्य एवं ईंधन कीमतों से जुड़ा हुआ है।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया है। अप्रैल-जून तिमाही में आर्थिक प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहने के बाद केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। RBI के अनुसार 2026-27 में पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.0%, दूसरी में 6.4%, तीसरी में 6.5% और चौथी तिमाही में 6.8% रहने का अनुमान है।

महंगाई के मोर्चे पर RBI ने CPI मुद्रास्फीति का अनुमान 2026-27 के लिए 5.0% रखा है। तीसरी तिमाही में यह 5.9% तक पहुंच सकती है, जबकि 2027-28 की पहली तिमाही में 5.3% रहने का अनुमान है। एल-नीनो, कमजोर और असमान मानसून तथा पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव आर्थिक वृद्धि के लिए प्रमुख जोखिम बताए गए हैं।

लिक्विडिटी की स्थिति पर RBI ने कहा कि जून 2026 की पिछली MPC बैठक के बाद बैंकिंग प्रणाली में औसतन ₹1 लाख करोड़ का दैनिक अधिशेष बना हुआ है। मानसून के दौरान मुद्रा की वापसी, सरकारी नकदी शेष में कमी और पूंजी प्रवाह बढ़ाने के विशेष उपायों से निकट अवधि में बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनी रहने की उम्मीद है। निवेशकों की नजर अब महंगाई के रुख और आगामी मौद्रिक नीति बैठकों पर रहेगी, क्योंकि भविष्य में ब्याज दरों का फैसला घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।