दिल्ली का ₹15,000 करोड़ EV मिशन: 2030 तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बड़ा दांव, खरीद पर भारी सब्सिडी

दिल्ली का ₹15,000 करोड़ EV मिशन: 2030 तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बड़ा दांव, खरीद पर भारी सब्सिडी

दिल्ली सरकार ने राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए ₹15,000 करोड़ के बजट वाली नई EV पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने कहा कि यह नीति 1 जुलाई 2026 से लागू होने की संभावना है और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। यह निवेश अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

सरकार का फोकस खासतौर पर उन वाहन श्रेणियों पर है, जो प्रदूषण में सबसे अधिक योगदान दे रही हैं। परिवहन आयुक्त निहारिका के अनुसार, दिल्ली के कुल प्रदूषण में 33% हिस्सा कमर्शियल गुड्स कैरियर वाहनों का है, जबकि 46% योगदान टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर से आता है। इसी कारण नीति का मुख्य लक्ष्य इन सेगमेंट्स को तेजी से EV में बदलना है।

नई पॉलिसी के तहत टू-व्हीलर खरीदने पर पहले साल ₹30,000, दूसरे साल ₹20,000 और तीसरे साल ₹10,000 की सब्सिडी मिलेगी। थ्री-व्हीलर के लिए यह प्रोत्साहन ₹50,000, ₹40,000 और ₹30,000 तय किया गया है। वहीं N1 कमर्शियल ट्रकों को पहले साल ₹1 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी।

पुराने BS-IV वाहनों को स्क्रैप करने पर भी आकर्षक इंसेंटिव मिलेगा। टू-व्हीलर के लिए ₹10,000, थ्री-व्हीलर के लिए ₹25,000 और N1 ट्रकों के लिए ₹50,000 की सहायता तय की गई है। चार-पहिया BS-IV या उससे पुराने वाहन स्क्रैप कर EV लेने वालों को ₹1 लाख तक का लाभ मिलेगा।

सरकार ने 2027 से केवल EV थ्री-व्हीलर और N1 ट्रकों के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने का फैसला लिया है, जबकि टू-व्हीलर के लिए यह नियम अप्रैल 2028 से लागू होगा। इसके साथ ही अगले चार वर्षों में 32,000 चार्जिंग पॉइंट लगाने की योजना है।

विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम दिल्ली के EV बाजार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों और ऑटो सेक्टर के लिए बड़ा ग्रोथ ट्रिगर बन सकता है, जबकि हाइब्रिड वाहनों को सब्सिडी से बाहर रखने का फैसला बाजार को साफ दिशा देता है।