Meta और Google को बड़ा झटका: सोशल मीडिया एडिक्शन केस में अमेरिकी ज्यूरी का ऐतिहासिक फैसला, बढ़ेगा कानूनी दबाव

Meta और Google को बड़ा झटका: सोशल मीडिया एडिक्शन केस में अमेरिकी ज्यूरी का ऐतिहासिक फैसला, बढ़ेगा कानूनी दबाव

अमेरिका में एक ऐतिहासिक फैसले में Meta और Google को बड़ा कानूनी झटका लगा है। लॉस एंजेलिस की ज्यूरी ने माना कि Instagram और YouTube जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की डिजाइन में ऐसी खामियां हैं जो उन्हें “लत लगाने वाला” बनाती हैं। इस सोशल मीडिया एडिक्शन केस में ज्यूरी ने Meta को 70% और Google को 30% जिम्मेदार ठहराते हुए कुल 6 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया।

यह फैसला बिग टेक कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है। यह मामला “डिजाइन डिफेक्ट” पर आधारित था, जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे फीचर्स विकसित किए जो यूजर्स, खासकर बच्चों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखते हैं। इस फैसले से भविष्य में ऐसे कई और मुकदमों का रास्ता खुल सकता है।

मामला KGM नाम की एक 20 वर्षीय युवती से जुड़ा है, जिसने दावा किया कि उसने कम उम्र में YouTube और Instagram का उपयोग शुरू किया और धीरे-धीरे अत्यधिक उपयोग की आदत विकसित हो गई। कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, उसने एक दिन में 16 घंटे तक Instagram इस्तेमाल किया। उसने आरोप लगाया कि इससे उसे चिंता, डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हुईं।

केस के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनियों ने “इनफिनिट स्क्रॉल” और नोटिफिकेशन जैसे फीचर्स को इस तरह डिजाइन किया, जिससे यूजर्स लगातार जुड़े रहें। वकीलों ने तर्क दिया कि यह रणनीति जुए और तंबाकू उद्योग की तरह व्यवहारिक तकनीकों से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य यूजर एंगेजमेंट और विज्ञापन राजस्व बढ़ाना था।

Meta और Google ने इन आरोपों से इनकार किया। Meta के CEO Mark Zuckerberg ने कोर्ट में कहा कि कंपनी का लक्ष्य यूजर्स का समय बढ़ाना नहीं है। वहीं कंपनियों ने Section 230 कानून का हवाला देते हुए खुद को जिम्मेदारी से बचाने की कोशिश की, लेकिन जज ने स्पष्ट किया कि कंटेंट की डिलीवरी और प्लेटफॉर्म डिजाइन अलग-अलग मुद्दे हैं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब Meta पहले ही एक अन्य मामले में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को छिपाने के आरोप में दोषी ठहराया जा चुका है। इस घटनाक्रम ने निवेशकों और नियामकों का ध्यान सोशल मीडिया कंपनियों के बिजनेस मॉडल और उनकी जिम्मेदारी पर केंद्रित कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला “बिग टेक का बिग टोबैको मोमेंट” साबित हो सकता है। आने वाले समय में हजारों समान मामले कोर्ट में जा सकते हैं, जिससे Meta और Google जैसी कंपनियों पर कानूनी और वित्तीय जोखिम बढ़ सकता है। दोनों कंपनियों ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है, लेकिन यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया एडिक्शन और प्लेटफॉर्म डिजाइन अब वैश्विक स्तर पर बड़ी कानूनी बहस का मुद्दा बन चुका है।