LPG सप्लाई पर बड़ा संकट: 3–4 साल तक राहत नहीं? कीमतों में और उछाल का खतरा

LPG सप्लाई पर बड़ा संकट: 3–4 साल तक राहत नहीं? कीमतों में और उछाल का खतरा

वैश्विक एलपीजी (LPG) सप्लाई चेन में आई बड़ी बाधा का असर लंबी अवधि तक बना रह सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, सप्लाई बहाली में कम से कम 3 से 4 साल लग सकते हैं, क्योंकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उत्पादन अस्थायी रूप से रुका है या स्थायी नुकसान हुआ है।

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। मौजूदा संकट की वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जहां Strait of Hormuz पर ब्लॉकेड और ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने सप्लाई को प्रभावित किया है। युद्ध से पहले भारत के लगभग 90% एलपीजी आयात इसी मार्ग से होते थे, जो अब घटकर 55% रह गए हैं। यह बदलाव सप्लाई में बाधा और स्रोतों के विविधीकरण दोनों को दर्शाता है।

सरकारी अधिकारी ने बताया कि प्रभावित सप्लायर्स से मिले संकेतों के आधार पर उत्पादन बहाली में लंबा समय लग सकता है। कुछ महत्वपूर्ण गैस फील्ड पूरी तरह बंद हो चुके हैं या उनकी उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ा है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, वैकल्पिक सप्लाई रूट और स्रोत तलाशने के बावजूद प्रभावी सप्लाई में 40–50% तक की कमी बनी रह सकती है। यह आकलन Rubix Data Sciences और Vayana TradeXchange की अप्रैल रिपोर्ट में सामने आया है।

भारत की कुल एलपीजी मांग करीब 33 मिलियन टन सालाना है, लेकिन स्टोरेज क्षमता सिर्फ 15 दिनों की खपत के बराबर है। ऐसे में सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट सीधे बाजार में कीमतों और उपलब्धता को प्रभावित करती है।

इस संकट का असर कीमतों पर भी दिखने लगा है। मार्च के मध्य से घरेलू 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर ₹115 तक महंगे हो चुके हैं। बढ़ती फ्रेट लागत और इंश्योरेंस प्रीमियम से आगे भी कीमतों में दबाव बना रह सकता है।

भारत के एलपीजी आयात में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी बेहद अहम है। FY25 में यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान से कुल 92% सप्लाई आई, जिसकी वैल्यू करीब $6 बिलियन रही। इनमें यूएई की हिस्सेदारी 41% और कतर की 22% रही। मौजूदा हमलों का सबसे ज्यादा असर यूएई पर पड़ा है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ा है।

सरकार फिलहाल घरेलू सप्लाई बनाए रखने पर फोकस कर रही है। कोविड के दौरान अपनाए गए उपाय जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आयात, शिपमेंट रीरूटिंग, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और मांग प्रबंधन फिर से लागू किए जा सकते हैं। खासतौर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सप्लाई में कोई बड़ी दिक्कत न हो।

हालांकि, बढ़ती कीमतें होटल, रेस्टोरेंट और MSME सेक्टर के लिए चुनौती बन रही हैं। साथ ही, घरेलू सब्सिडी का बोझ भी तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ सकता है।

भारत भले ही पेट्रोलियम उत्पादों का नेट एक्सपोर्टर है, लेकिन एलपीजी, नेफ्था और फ्यूल ऑयल जैसे ईंधनों के लिए आयात पर निर्भरता उसे वैश्विक अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाती है। आने वाले समय में सप्लाई चेन का यह संकट भारत के ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई पर बड़ा असर डाल सकता है।