भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले मजबूत वापसी करते हुए 77 पैसे उछलकर 95.08 के स्तर पर बंद हुआ। यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों के चलते देखने को मिली।
दिन की शुरुआत रुपया 95.32 प्रति डॉलर पर मजबूती के साथ हुई, हालांकि कारोबार के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव बना रहा और यह एक समय 95.52 के इंट्राडे लो तक फिसला। लेकिन जैसे ही बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रगति की खबरें आईं, निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और डॉलर की खरीदारी में कमी देखी गई।
ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 85.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जो पिछले तीन महीनों का निचला स्तर है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे आयात बिल और चालू खाते पर दबाव कम हो सकता है।
HDFC Securities के विदेशी मुद्रा विश्लेषक Dilip Parmar के अनुसार, कमजोर डॉलर और नरम कच्चे तेल की कीमतों ने रुपये को सपोर्ट दिया। वहीं Kotak Mahindra Bank का मानना है कि आरबीआई के हालिया कदम डॉलर इनफ्लो बढ़ाने में मदद करेंगे, जिससे रुपया आने वाले महीनों में 93–93.5 तक मजबूत हो सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल 94.80–95.50 का दायरा रुपये के लिए अहम रहेगा। अगर रुपया 94.80 के नीचे टिकता है, तो यह 94 के स्तर की ओर और मजबूत हो सकता है। निवेशकों की नजर अब वीकेंड में होने वाले अमेरिका-ईरान घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

