भारत का शेयर बाजार वैश्विक मार्केट कैपिटलाइजेशन रैंकिंग में एक और झटका झेलते हुए सातवें स्थान पर पहुंच गया है। ताइवान के बाद अब दक्षिण कोरिया ने भी भारत को पीछे छोड़ दिया है। एशियाई बाजारों के प्रदर्शन में बढ़ते अंतर ने निवेशकों का ध्यान खींचा है।
1 जून तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का कुल बाजार पूंजीकरण 5.04 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि भारत का मार्केट कैप 4.84 ट्रिलियन डॉलर पर रहा। वहीं ताइवान 5.15 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें स्थान पर मौजूद है, जबकि दक्षिण कोरिया छठे स्थान पर पहुंच गया है।
इस बदलाव के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेज उछाल बड़ी वजह माना जा रहा है। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 2026 में अब तक 110% से अधिक चढ़ चुका है, जबकि ताइवान के बाजार में 65% से ज्यादा तेजी देखी गई है। दोनों बाजार इस साल दुनिया के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख बाजारों में शामिल हैं।
AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से सेमीकंडक्टर कंपनियों को बड़ा फायदा मिला है। TSMC, Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों ने मजबूत कमाई दर्ज की है। दोनों बाजारों में सेमीकंडक्टर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी कंपनियों की हिस्सेदारी कुल मार्केट कैप का करीब 60% है।
दूसरी ओर भारत के लिए 2026 चुनौतीपूर्ण रहा है। इस साल अब तक सेंसेक्स करीब 12% और निफ्टी लगभग 15% गिर चुके हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, ऊंचे वैल्यूएशन, कमजोर कॉर्पोरेट आय और AI आधारित कंपनियों की कमी ने बाजार पर दबाव बनाया है।
इसके अलावा वैश्विक व्यापार तनाव, रुपये पर दबाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है। इससे महंगाई और व्यापार संतुलन पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती कमोडिटी लागत और मार्जिन पर दबाव आने वाले महीनों में भारतीय कंपनियों की कमाई को प्रभावित कर सकता है।

