भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को अपर लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC-UL) की नई सूची जारी कर दी है। इस बार सूची में चार सरकारी वित्तीय संस्थानों—REC, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) और हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO)—को शामिल किया गया है। इसके साथ ही NBFC-UL कंपनियों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है, जबकि पिछली FY25 सूची में यह संख्या 15 थी।
RBI ने FY26 के लिए अलग सूची जारी नहीं की थी क्योंकि अपर लेयर NBFC की पहचान के मानदंडों की समीक्षा की जा रही थी। नई सूची में PNB हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल को बाहर किया गया है। हालांकि, RBI के नियमों के अनुसार NBFC-UL श्रेणी से बाहर होने के बाद भी ऐसी कंपनियों पर अगले पांच वर्षों तक कड़े नियामकीय प्रावधान लागू रहेंगे।
नई सूची में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, LIC हाउसिंग फाइनेंस, टाटा कैपिटल, टाटा संस, मुथूट फाइनेंस, आदित्य बिड़ला कैपिटल, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, L&T फाइनेंस, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, HDB फाइनेंशियल सर्विसेज और पिरामल फाइनेंस जैसी प्रमुख कंपनियां भी शामिल हैं।
RBI ने टाटा संस को भी सूची में बरकरार रखा है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह फैसला कंपनी की NBFC पंजीकरण समाप्त करने की लंबित अर्जी के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेगा। टाटा संस को पहली बार 2022 में NBFC-UL श्रेणी में रखा गया था और इसके बाद कंपनी ने अपने वित्तीय कारोबार का पुनर्गठन शुरू किया था।
NBFC-UL श्रेणी में शामिल संस्थानों पर पूंजी पर्याप्तता, कॉरपोरेट गवर्नेंस, जोखिम प्रबंधन और खुलासों से जुड़े अधिक सख्त नियम लागू होते हैं। RBI का स्केल-बेस्ड रेगुलेशन फ्रेमवर्क NBFC को बेस, मिडिल, अपर और टॉप लेयर में वर्गीकृत करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नई सूची से बड़े सरकारी वित्तीय संस्थानों की निगरानी और जोखिम प्रबंधन व्यवस्था और मजबूत होगी, जिससे वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

