भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप सुविधा शुरू होने के बाद विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक [FCNR(B)] जमा में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त मंत्रालय द्वारा लोकसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 5 जून 2026 को 32.56 अरब डॉलर रहे FCNR(B) जमा 30 जुलाई 2026 तक बढ़कर 60.55 अरब डॉलर पर पहुंच गए। यानी दो महीने से भी कम समय में इनमें करीब 86% की वृद्धि हुई।
RBI ने 8 जून 2026 को तीन से पांच वर्ष की अवधि वाले नए FCNR(B) जमा के लिए विशेष स्वैप विंडो शुरू की थी। यह सुविधा 16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी और 8 जून से 30 सितंबर के बीच जुटाई गई जमा राशि पर लागू होगी। इसका उद्देश्य स्थिर विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाना, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना और रुपये पर दबाव कम करना है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में कहा कि यह कदम भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग प्रणाली की तरलता में वास्तविक बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वैप सुविधा के तहत कुल कितनी विदेशी मुद्रा जुटाई जाती है।
FCNR(B) जमा जुटाने में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे आगे रहा। SBI का बकाया FCNR(B) जमा 9.70 अरब डॉलर से बढ़कर 13.82 अरब डॉलर हो गया, जो 4.12 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी है। इसके बाद HSBC (6.26 अरब डॉलर), ICICI Bank (6.06 अरब डॉलर), HDFC Bank (5.42 अरब डॉलर) और Axis Bank (4.67 अरब डॉलर) का स्थान रहा। इन पांच बैंकों ने कुल FCNR(B) जमा का बड़ा हिस्सा जुटाया।
RBI ने इस अवधि के दौरान पात्र नए FCNR(B) जमा को कैश रिजर्व रेशियो (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) की अनिवार्यता से भी छूट दी है। सरकार का कहना है कि स्वैप सुविधा की वास्तविक लागत जुटाई गई विदेशी मुद्रा, परिपक्वता अवधि और फॉरवर्ड प्रीमियम जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। साथ ही, RBI के पास विदेशी मुद्रा भंडार और विनिमय दर से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है। यह अस्थायी पहल भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ मुद्रा जोखिमों पर नियंत्रण बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

