HDFC Bank कानूनी जांच में पूर्व चेयरमैन के आरोपों को नहीं मिला समर्थन, शेयरधारकों की चिंता पर बैंक ने दी सफाई

HDFC Bank कानूनी जांच में पूर्व चेयरमैन के आरोपों को नहीं मिला समर्थन, शेयरधारकों की चिंता पर बैंक ने दी सफाई

भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank ने शुक्रवार को कहा कि स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में पूर्व चेयरमैन Atanu Chakraborty के इस्तीफे में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या समकालीन सबूत नहीं मिले हैं। यह समीक्षा बैंक बोर्ड के रिकॉर्ड, आंतरिक संचार और गवाहों के इंटरव्यू के आधार पर की गई।

मार्च 2026 में अतनु चक्रवर्ती ने “वैल्यूज़ और एथिक्स” को लेकर मतभेदों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दिया था। इस कदम के बाद HDFC Bank के शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई थी, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई थी।

बैंक ने बताया कि करीब तीन महीने चली इस जांच में अमेरिकी लॉ फर्म Wilson Sonsini Goodrich & Rosati और Wadia Ghandy & Co. को शामिल किया गया था। समीक्षा में बोर्ड और बोर्ड कमेटी के मिनट्स, संबंधित दस्तावेज़ और संचार की जांच की गई।

जांच में यह भी सामने आया कि चक्रवर्ती ने कथित “Dubai matter” या किसी अन्य बोर्ड फैसले पर उस समय कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। बैंक के अनुसार, उन्हें कई बार समीक्षा प्रक्रिया में शामिल होने के लिए बुलाया गया, लेकिन उनका इंटरव्यू नहीं हो सका।

यह विवाद खास तौर पर दुबई में Additional Tier-1 (AT1) बॉन्ड्स की कथित मिस-सेलिंग से जुड़ा था। AT1 बॉन्ड्स हाई-रिस्क निवेश माने जाते हैं और इनके गलत वितरण से बैंकिंग सेक्टर में भरोसे पर असर पड़ सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस रिपोर्ट से HDFC Bank की गवर्नेंस पर उठे सवाल कुछ हद तक शांत हो सकते हैं, लेकिन निवेशक आगे भी नियामकीय और प्रबंधन स्तर की पारदर्शिता पर नजर बनाए रखेंगे।