पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिली। निफ्टी 50 215 अंक (0.89%) बढ़कर 24,271 पर और सेंसेक्स 663 अंक (0.86%) चढ़कर 77,764 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी मिडकैप 100 में 0.64% और स्मॉलकैप 100 में 2.05% की बढ़त दर्ज की गई। अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी, फेड की ब्याज दरों को लेकर कम होती आशंकाएं और भारत में मानसून की रफ्तार ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।
अब बाजार की नजर 9 जुलाई को आने वाले TCS के पहली तिमाही (Q1FY27) नतीजों पर रहेगी, जिससे कॉरपोरेट अर्निंग सीजन की शुरुआत होगी। इसके अलावा L&T Finance, Avenue Supermarts, Anand Rathi Wealth और GM Breweries भी अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगे। कंपनियों का पूरे वित्त वर्ष का आउटलुक निवेशकों के लिए अहम रहेगा।
वैश्विक स्तर पर 8 जुलाई को जारी होने वाले FOMC मिनट्स सबसे बड़ा ट्रिगर होंगे। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर कितना सख्त या नरम रुख अपनाने वाला है। इसके साथ ही यूरोप की रिटेल सेल्स, PPI और चीन के महंगाई एवं वाहन बिक्री के आंकड़ों पर भी नजर रहेगी।
कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा तय करेंगी। ब्रेंट क्रूड लगभग 71.80 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो फरवरी के बाद का सबसे निचला स्तर है। मई के उच्च स्तर से तेल कीमतों में करीब 37% की गिरावट भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए राहत मानी जा रही है। हालांकि अगस्त से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर संभावित ट्रांजिट शुल्क शिपिंग लागत बढ़ा सकता है।
घरेलू स्तर पर मानसून की प्रगति, बैंक ऋण और जमा वृद्धि के आंकड़े, विदेशी मुद्रा भंडार तथा विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। पिछले सप्ताह FIIs ने 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की, जबकि DIIs ने 12,600 करोड़ रुपये की खरीद कर बाजार को सहारा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर होते कच्चे तेल के दाम और स्थिर होती रुपये की स्थिति आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की वापसी का रास्ता खोल सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि निफ्टी 24,400 के ऊपर टिकता है तो 24,600-24,800 की ओर बढ़ सकता है, जबकि 24,000-24,200 का दायरा निकटतम मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। ऐसे में अगले सप्ताह घरेलू और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

