भारत के पावर सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकारी कंपनियों Power Finance Corporation (PFC) और REC Limited (REC) के बोर्ड ने मर्जर योजना को मंजूरी दे दी है। इस डील के बाद देश में करीब ₹11 लाख करोड़ के संयुक्त लोन बुक वाली विशाल पावर फाइनेंसिंग कंपनी बनेगी।
रविवार देर रात जारी बयान में PFC ने कहा कि REC को PFC में विलय किया जाएगा। यह प्रक्रिया कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 230 से 232 के तहत पूरी होगी। मर्जर के बाद सरकार की बहुमत हिस्सेदारी और नियंत्रण बरकरार रहेगा, जिससे नई इकाई सरकारी कंपनी का दर्जा बनाए रखेगी।
इस सौदे के तहत REC के शेयरधारकों को हर 100 शेयरों के बदले PFC के 88 इक्विटी शेयर मिलेंगे। यह शेयर स्वैप अनुपात संयुक्त वैल्यूएशन रिपोर्ट के आधार पर तय किया गया है। रिकॉर्ड डेट की घोषणा बाद में होगी।
यह कदम सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की NBFC कंपनियों में स्केल बढ़ाने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने भी इस साल बजट में इस पुनर्गठन का संकेत दिया था।
दिलचस्प बात यह है कि REC ने साथ ही ₹1.4 लाख करोड़ तक फंड जुटाने की योजना को भी मंजूरी दी है। इससे कंपनी की लेंडिंग क्षमता और मजबूत हो सकती है। निवेशकों के लिए सोमवार को दोनों शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है।

