भारत की प्रमुख आईटी सेवा कंपनियां FY27 की पहली तिमाही में उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन दर्ज कर सकती हैं। TCS, Infosys, Wipro और HCLTech पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बढ़ते प्राइसिंग प्रेशर, ग्राहकों के सीमित खर्च और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर देखने को मिल सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार आईटी सेक्टर की कमाई का सीजन 9 जुलाई को TCS के नतीजों से शुरू होगा।
अप्रैल-जून तिमाही में आमतौर पर नए प्रोजेक्ट्स और ज्यादा बिलिंग दिनों का फायदा मिलता है, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इस बार मांग कमजोर बनी रह सकती है। रॉयटर्स द्वारा संकलित नौ ब्रोकरेज अनुमानों के मुताबिक, देश की छह सबसे बड़ी आईटी कंपनियों की रुपये के आधार पर आय में लगभग 14% सालाना वृद्धि और शुद्ध लाभ में 12-13% बढ़ोतरी का अनुमान है। हालांकि, इसमें बड़ा योगदान रुपये की कमजोरी का माना जा रहा है। कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर राजस्व वृद्धि केवल 2.8% रहने का अनुमान है।
विश्लेषकों का कहना है कि कंपनियां तेजी से AI टूल्स और AI एजेंट्स अपना रही हैं, जिससे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की लागत कम हो रही है। लेकिन इसका असर पारंपरिक प्राइसिंग मॉडल पर पड़ रहा है और आईटी कंपनियों को अपनी AI सेवाओं में अधिक निवेश करना पड़ रहा है। इसी कारण कई कंपनियों ने नई भर्तियों की रफ्तार भी धीमी कर दी है।
नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में मौजूदा माहौल को आईटी सेक्टर के लिए “परफेक्ट स्टॉर्म” बताया है। वहीं PL Capital के अनुसार, ग्राहकों के फैसलों में देरी और लंबा सेल्स साइकिल उपभोक्ता, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में नए प्रोजेक्ट्स की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है।
निवेशकों की नजर अब कंपनियों के सालाना ग्रोथ गाइडेंस पर रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यदि मांग कमजोर बनी रहती है तो Infosys और HCLTech अपनी राजस्व वृद्धि के ऊपरी अनुमान को घटा सकती हैं। AI से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आईटी खर्च में सुस्ती के चलते इस साल आईटी शेयरों पर भी दबाव बना हुआ है, जिससे आने वाले तिमाही नतीजे निवेशकों के लिए बेहद अहम रहेंगे।

