भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए विदेशी पूंजी प्रवाह और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए कई अहम कदमों की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाया है। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया।
आरबीआई ने साथ ही यह भी संकेत दिया कि महंगाई और वैश्विक आर्थिक जोखिमों के बीच नीति निर्माण में लचीलापन बनाए रखा जाएगा। गवर्नर ने कहा कि भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति मजबूत है और देश के पास बाहरी झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त क्षमता मौजूद है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार वर्तमान में 682.3 अरब डॉलर के स्तर पर है।
विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने कई नियमों में ढील दी है। सरकार के सरकारी बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से Fully Accessible Route (FAR) के तहत 15, 30 और 40 वर्ष की नई सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए अल्पकालिक निवेश और एकल प्रतिभूतियों से जुड़े कुछ प्रतिबंध भी हटाए गए हैं।
आरबीआई ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध इक्विटी साधनों में निवेश के लिए अनिवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज सिटिजंस ऑफ इंडिया (OCI) की निवेश सीमा भी बढ़ा दी है। यह सुविधा अब अन्य विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों तक भी बढ़ाई जाएगी। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए विदेशी वाणिज्यिक उधार (ECB) को प्रोत्साहित करने हेतु 30 सितंबर 2026 तक रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। नई 3–5 वर्ष की FCNR(B) जमा योजनाओं के लिए बैंकों को पूर्ण हेजिंग लागत सहायता भी दी जाएगी।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष FY27 के लिए आर्थिक विकास अनुमान को पहले के 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। वहीं खुदरा महंगाई (CPI) अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। गवर्नर ने कहा कि खाद्य कीमतों का परिदृश्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है और ईंधन कीमतों का असर धीरे-धीरे दिखाई देना शुरू हो गया है।
हालांकि मार्च और अप्रैल में हेडलाइन सीपीआई महंगाई क्रमशः 3.4% और 3.5% रही, जो आरबीआई के 4% लक्ष्य से नीचे थी। कोर महंगाई भी 3.7% पर स्थिर रही। इसके बावजूद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और सप्लाई चेन पर संभावित प्रभावों ने केंद्रीय बैंक को सतर्क बनाए रखा है।
नीति फैसले के बाद बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 पर पहुंच गया। विदेशी निवेश बढ़ाने वाले कदमों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और बाजार को संकेत मिला कि आरबीआई आर्थिक स्थिरता और पूंजी प्रवाह को संतुलित रखने पर फोकस कर रहा है। आने वाले महीनों में वैश्विक जोखिम और महंगाई का रुख आगे की नीति दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
| प्रमुख घोषणा | नया अपडेट |
|---|---|
| रेपो रेट | 5.25% पर स्थिर |
| MPC रुख | न्यूट्रल (Neutral Stance) |
| विदेशी मुद्रा भंडार | $682.3 अरब |
| FY27 GDP अनुमान | 6.6% (पहले 6.9%) |
| FY27 CPI महंगाई अनुमान | 5.1% (पहले 4.6%) |
| मार्च CPI महंगाई | 3.4% |
| अप्रैल CPI महंगाई | 3.5% |
| कोर महंगाई | 3.7% |
| उपाय | संभावित असर |
|---|---|
| 15, 30 और 40 वर्ष के नए G-Secs को FAR में शामिल किया | सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश बढ़ सकता है |
| FPI निवेश प्रतिबंधों में ढील | विदेशी पूंजी प्रवाह आसान होगा |
| NRI और OCI निवेश सीमा बढ़ाई | शेयर बाजार में अधिक निवेश संभव |
| PSU के ECB के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा | डॉलर फंडिंग आकर्षित करने में मदद |
| FCNR(B) जमा पर पूर्ण हेजिंग सहायता | बैंकिंग सिस्टम में डॉलर प्रवाह बढ़ सकता है |
| एक्सपोर्ट प्रोसिड्स अवधि फिर 9 महीने | निर्यातकों को राहत |
| बाजार संकेतक | स्थिति |
|---|---|
| रुपया बनाम डॉलर | 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 |
| सेंसेक्स शुरुआती बढ़त | +269 अंक |
| निफ्टी शुरुआती बढ़त | +62 अंक |
| निवेशकों की भावना | सकारात्मक |

