बेंगलुरु स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स एक साथ दो बड़े संकटों में घिरती नजर आ रही है। एक तरफ भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी पर कथित राजस्व गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख कर्जदाता केनरा बैंक ने कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस घटनाक्रम ने निवेशकों और बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
SEBI ने 3 जून को जारी अंतरिम आदेश में कंपनी और इसके चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता को जांच पूरी होने तक प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक के अनुसार, कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया, जो कंपनी की कुल आय का लगभग 99.8% हिस्सा बताया गया है।
SEBI की जांच में सामने आया कि कंपनी के 97% से 99% तक समेकित राजस्व विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से स्विट्जरलैंड स्थित Valcambi SA से जुड़ा था, लेकिन इन इकाइयों की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई।
नियामक ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी ने Affluence Shares and Stocks Pvt. Ltd. के साथ ₹11,487 करोड़ की बिक्री और ₹11,488 करोड़ की खरीद दर्ज की, जबकि संबंधित संस्था ने इन लेनदेन से इनकार किया है। इसके अलावा, ₹339 करोड़ की राशि कथित रूप से बिना बोर्ड मंजूरी के प्रमोटर के व्यक्तिगत खातों में भेजी गई। SEBI के अनुसार, इससे शेयरधारकों की लगभग ₹12,726 करोड़ की संपत्ति प्रभावित हुई।
इस बीच, केनरा बैंक ने कंपनी पर ₹509 करोड़ के बकाया कर्ज को तनावग्रस्त संपत्ति घोषित कर दिया है और इसे खुले ऑक्शन के जरिए बेचने का फैसला किया है। दूसरी ओर, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की कंपनी में 10.8% हिस्सेदारी होने के कारण उसका भी जोखिम बढ़ गया है।
हालांकि, राजेश मेहता ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SEBI के निष्कर्ष सटीक नहीं हैं और कंपनी जल्द विस्तृत जवाब पेश करेगी। आने वाले दिनों में यह मामला निवेशकों और बाजार नियामकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

