भारत का गोल्ड और ज्वेलरी बाजार तेज़ी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां बढ़ती औपचारिकता और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव संगठित कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहे हैं। इसी माहौल में Titan Company जैसी कंपनियां आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी विजेता बनकर उभर सकती हैं।
हाल ही में सोने के आयात पर प्रभावी टैक्स बोझ बढ़कर करीब 18% पहुंच गया है। इससे अनौपचारिक बाजार और संगठित चैनलों के बीच अंतर बढ़ने की आशंका है। हालांकि, पिछले एक दशक में सेक्टर में तेजी से बढ़ी औपचारिकता इस असर को सीमित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता अब शुद्धता, पारदर्शी कीमत और भरोसेमंद ब्रांड को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
रिकॉर्ड ऊंचे सोने के दामों के बावजूद मांग मजबूत बनी हुई है। भारत में शादी-ब्याह से जुड़ी खरीदारी कुल ज्वेलरी खपत का लगभग 60% हिस्सा बनाती है, जो बाजार को स्थिरता देती है। साथ ही युवा उपभोक्ताओं के बीच गोल्ड बार और कॉइन की मांग बढ़ रही है, जिससे सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि निवेश साधन के रूप में भी मजबूत हो रहा है।
इसी ट्रेंड का फायदा टाइटन के ज्वेलरी ब्रांड Tanishq को मिल रहा है। कंपनी ने चौथी तिमाही FY26 में 81% सालाना राजस्व वृद्धि दर्ज की, जबकि घरेलू ज्वेलरी कारोबार में 50% समान-स्टोर बिक्री वृद्धि रही। स्टैंडअलोन ज्वेलरी EBIT में 29% की बढ़ोतरी हुई। FY26 में कंपनी का राजस्व, EBITDA और PAT क्रमशः 45%, 34% और 37% बढ़ा।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत का बिखरा हुआ ज्वेलरी बाजार तेजी से संगठित रिटेल की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल ट्रेसबिलिटी, ब्लॉकचेन और गोल्ड टोकनाइजेशन जैसी तकनीकें भी सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ा सकती हैं। ऐसे में मजबूत ब्रांड, सप्लाई नेटवर्क और युवा ग्राहकों पर फोकस रखने वाली कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी लगातार बढ़ने की संभावना है।

