भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर 2026) के लिए केंद्रीय सरकार के लिए Ways and Means Advances (WMA) की सीमा ₹2,50,000 करोड़ निर्धारित की है। यह कदम सरकार के नकदी प्रवाह में अस्थायी अंतर को पूरा करने और बॉन्ड बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
WMA एक तरह का ब्रिज-लोन है, जो सरकार को कर संग्रह और निजी निवेश से प्राप्त आय के अंतराल के दौरान खर्च की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करता है। इस व्यवस्था के तहत जब सरकार 75 प्रतिशत सीमा यानी ₹1,87,500 करोड़ का उपयोग कर लेगी, तो रिज़र्व बैंक ताज़ा सरकारी बॉन्ड या ट्रेज़री बिल जारी करने का संकेत देगा। यह संकेत बाजार प्रतिभागियों के लिए ब्याज दरों और बॉन्ड आपूर्ति के पूर्वानुमान में अहम भूमिका निभाता है।
WMA पर ब्याज दर मौजूदा रेपो दर के अनुरूप होगी, जबकि यदि सरकार ₹2,50,000 करोड़ की सीमा पार करती है, तो ओवरड्राफ्ट पर ब्याज दर रेपो दर से दो प्रतिशत अधिक होगी। इस तिहरे संरचना का उद्देश्य वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और सरकार को बाजार-आधारित उधार लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
विश्लेषकों के अनुसार, ₹2.5 लाख करोड़ की WMA सीमा यह संकेत देती है कि RBI सरकार को पहली छमाही में महत्वपूर्ण पूंजीगत व्यय के लिए पर्याप्त तरलता सुनिश्चित कर रहा है। इससे सरकार को बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव के समय उधार लेने की आवश्यकता नहीं होगी और बॉन्ड बाजार में यील्ड कर्व स्थिर बनी रहेगी।
इस कदम से सरकारी खर्च में अनुशासन के साथ-साथ भारतीय डेट मार्केट में स्थिरता बनी रहेगी और निवेशकों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शक भी स्थापित होगा।

