भारतीय निवेशकों के लिए अच्छे संकेत मिल सकते हैं, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आगामी रेपो रेट घोषणा से फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) रेट में बदलाव की संभावना है। वैश्विक घटनाक्रम, खासकर इज़राइल-ईरान संघर्ष, भारत में महंगाई पर असर डाल रहा है, जिससे ईंधन, ऊर्जा, खाद और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं।
पिछले साल जनवरी 2025 से RBI ने लगातार रेपो रेट में कटौती की थी, जिससे कई बैंक और छोटे वित्तीय बैंक (SFB) ने FD रेट कम कर दिए थे। हालांकि, दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 की मौजूदा MPC बैठकों में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा गया, जिससे कुछ बैंकों ने FD रेट बनाए रखा या धीरे-धीरे बढ़ाने की संभावना जताई।
विश्लेषकों के अनुसार, इज़राइल-ईरान संघर्ष से ईंधन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि इस समय RBI को तत्काल रेपो रेट बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन भविष्य में MPC की बैठकों में दरों में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है। रेपो रेट बढ़ने पर बैंक और SFB FD रेट में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
Adhil Shetty, CEO, Bankbazaar.com का मानना है कि RBI इस बार रेपो रेट को स्थिर रख सकता है। Vinayak Magotra, Centricity WealthTech के प्रोडक्ट हेड, भी इस बात की संभावना जताते हैं कि मौजूदा नीतिगत कदम जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि FD रेट केवल रेपो रेट पर निर्भर नहीं करता, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में तरलता, G-Sec यील्ड, क्रेडिट मांग और छोटे बचत स्कीमों का भी प्रभाव होता है। वर्तमान में, बैंकिंग सिस्टम में तरलता अपेक्षाकृत कम है और क्रेडिट ग्रोथ डिपॉजिट ग्रोथ से अधिक है, जिससे बैंक आकर्षक FD रेट बनाए रखने के लिए मजबूर हैं।
अंततः, विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट भविष्य में FD रेट स्थिर रह सकते हैं, जबकि वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतक भविष्य में बदलाव ला सकते हैं।

