भारत सरकार से हथियार निर्माण का लाइसेंस मिलने के बाद Apollo Micro Systems और Zen Technologies के शेयरों में 17 अप्रैल 2026 को तेज उछाल दर्ज किया गया। Apollo Micro Systems का शेयर NSE पर इंट्राडे में 18.51% तक उछलकर ₹287 पर पहुंच गया, जबकि Zen Technologies का शेयर 6.80% बढ़कर ₹1628 पर बंद हुआ। यह तेजी सरकार की रणनीतिक मंजूरी के बाद आई, जिसने दोनों कंपनियों की ग्रोथ संभावनाओं को मजबूत किया है।
Apollo Micro Systems को यह लाइसेंस Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) द्वारा 10 अप्रैल 2026 को जारी किया गया है, जो लाइफटाइम के लिए वैध है। इस लाइसेंस के तहत कंपनी अब 12.77 mm से अधिक कैलिबर के उन्नत हथियार और म्यूनिशन का निर्माण कर सकेगी। इसमें मिसाइल, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM), टॉरपीडो, अंडरवॉटर माइंस, फ्लेयर्स और डिकॉय जैसे सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी एरियल बम, रॉकेट और लोइटरिंग म्यूनिशन भी बनाएगी।
कंपनी की योजना है कि हैदराबाद स्थित अपनी दो यूनिट्स में प्रति श्रेणी 1,000 यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता विकसित की जाए। इस लाइसेंस के बाद Apollo Micro Systems अब केवल सब-सिस्टम सप्लायर से आगे बढ़कर एंड-टू-एंड वेपन सिस्टम मैन्युफैक्चरर बन जाएगी। कंपनी का मार्केट कैप 17 अप्रैल 2026 तक ₹10,103.87 करोड़ रहा, जबकि पिछले एक हफ्ते में शेयर 19% और एक महीने में 39% तक चढ़ चुका है।
दूसरी ओर, Zen Technologies को भी इसी तरह की सरकारी मंजूरी का फायदा मिला है। कंपनी पहले से ही एंटी-ड्रोन सिस्टम और कॉम्बैट ट्रेनिंग सिमुलेटर के क्षेत्र में सक्रिय है। हाल ही में कंपनी को Ministry of Defence से करीब ₹404 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं, जिसमें एंटी-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं।
ग्लोबल स्तर पर बढ़ते ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन खतरों के बीच, Zen Technologies की तकनीक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कंपनी गोवा में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही है और अमेरिकी बाजार में भी विस्तार की तैयारी में है।
विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा। इससे निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी और निर्यात के अवसर भी खुलेंगे।
कुल मिलाकर, Apollo Micro Systems और Zen Technologies को मिला यह लाइसेंस न केवल उनके बिजनेस मॉडल को मजबूत करता है, बल्कि भारत के डिफेंस सेक्टर को भी नई दिशा देता है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि आने वाले समय में इस सेक्टर में ग्रोथ की संभावनाएं और तेज हो सकती हैं।

